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शुक्रवार, 11 फ़रवरी 2022
शनिवार, 14 नवंबर 2020
मर और अमर में भेद
🔥 दीपोत्सव की हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं🔥
💥बलिदान दिवस-💥
दीपावली को आर्य जगत् बलिदान दिवस के रूप मेें मनाता हैं क्योंकि आज ही के दिन आर्यों के पथ प्रदर्शक पुण्यआत्मा के जीवन का अन्त हुआ था। उस महान आत्मा को लोग महर्षि दयानन्द के नाम से जानते हैं। इस महान आत्मा ने समाज में फैले अनेक कुरीतियों को दूर किया। ऐसा कोई वर्ग नहीं जिस पर कार्य न किया हो। मानव जीवन के विकास के हर पहलु पर कार्य करके समाज का ध्यानाकृष्ट कराया। आज दुनियां में वो महान आत्मा "वेदों वाला ऋषि" देव दयानन्द के नाम से जाना जाता है।
मर और अमर में भेद-
मर और अमर में यही भेद है कि महान आत्मा अपने कर्मों से समाज को सुख के सुमार्ग दिखाकर जाते हैं जिससे समाज उनके कल्याणकारी मार्ग का गुणगान करता हुआ जीवन जीने का प्रयास करता और जन-मानस के बीच सदा बना रहता है। जो सदा सबके बीच है वहीं है इसे ही अमर होना कहा जाता है और सामान्य आत्मा सामान्य जीवन व्यतीत करके दुनियां से चला जाता है कोई नाम लेने वाला नहीं होता उसका नाम मिट जाता है अर्थात् मर जाता है। परोपकारी व्यक्ति, संत-महात्माओं का सदा समाज में गूंजता रहता है। महर्षि दयानन्द के जन हितकारी कुछ कार्यों की झलक इस प्रकार है-
जब सूरज चांद रहेगा,
ऋषि दयानन्द का रहेगा,
तू तो था ऋषि निराला,
बाल विवाह बन्द कराया,
माता कहकर नारी का सम्मान बढ़ाया,
नारी को पढ़ने का अधिकार दिलाया,
विधवा विवाह शुरु कराया,
दलितों को गले लगाया,
गौरक्षा का बिगुल बजाया,
स्वदेश का अलख जगाया।
ऐसे महान् आत्मा को शत शत नमन।
🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹
बुधवार, 8 अप्रैल 2020
"कार्य की सफलता" (Success of work)
🔥।।ओ३म्।।🔥
"कार्य की सफलता" (Success of work)
कार्यकुशलता व सुव्यवस्था पर निर्भर है। इन दोनों का आधार धैर्य है जो सफलता की प्रथम सीढ़ी है। ऐसे ही त्रेतायुग के सुप्रसिद्ध देश व धर्म रक्षक ओज-तेज से पूर्ण शारीरिक, मानसिक व चारित्रिक बल के धनी, कार्य कुशल धीर, वीर, गम्भीर, वेद-वेदांगों के ज्ञाता प्रभु श्रीराम के कार्य को सफल बनाने वाले भक्त बाल ब्रह्मचारी महाबीर हनुमान जी जयन्ती पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएं।
शुक्रवार, 20 सितंबर 2019
भगवान् श्रीराम का अस्तित्व
💥।।ओ३म्।।💥
रामायण के दो व्यक्ति को,
कोई भी अच्छा नहीं कहता,
जिसमें एक है स्त्री,
और एक है पुरुष,
आजतक उस नाम से,
अपने बच्चों का नाम भी,
कोई नहीं रखता है,
लेकिन इन दोनों की,
भूमिका से ही
भगवान् श्रीराम जी,
का उज्जवल अस्तित्व,
हमारे सामने है,
यदि ये दोनों पुण्य,
आत्माओं को हटाकर,
देखिए रामायण,
कहां नजर आता है।
विचारिये और अपना,
विचार दीजिए,
उस पात्र का नाम भी बताइये। ओ३म
🙏🏻🙏🏻🙏🏻
👌 और कमेंट के माध्यम से त्रुटियों पर ध्यानाकर्षित अवश्य करायें जिससे सुधार सकूं, आपका एक लाइक, कमेंट मेरा उत्साहवर्धन व त्रुटि सुधार के लिए अनमोल है। धन्यवाद
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कोई भी अच्छा नहीं कहता,
जिसमें एक है स्त्री,
और एक है पुरुष,
आजतक उस नाम से,
अपने बच्चों का नाम भी,
कोई नहीं रखता है,
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भूमिका से ही
भगवान् श्रीराम जी,
का उज्जवल अस्तित्व,
हमारे सामने है,
यदि ये दोनों पुण्य,
आत्माओं को हटाकर,
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कहां नजर आता है।
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