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शनिवार, 11 अप्रैल 2020

महामारी फैलने का मुख्य कारण {Reasons for EPIDEMIC outbreak}

                 ॥ओ३म्॥

महामारी फैलने का मुख्य कारण

  {Reasons for EPIDEMIC outbreak}




[ले०दीपिका, बी.ए.एम.एस. द्वितीय वर्ष, पतञ्जलि आयुर्वेद महाविद्यालय, हरद्वार, (उत्तराखण्ड) 9991337335]
 [आज न केवल मानव अपितु सम्पूर्ण प्राणि-जगत् विश्व स्तर पर त्रिविध तापों (आध्यात्मिक, आधिभौतिक, आधिदैविक) से त्रस्त होकर त्राहि-त्राहि कर रहा है। सभी प्राणियों में मनुष्य को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है (न मानुषात् श्रेष्ठतरं हि किञ्चित्। महाभारत, शान्तिपर्व ३२९.८)]। लेकिन यह तब है जबकि वह स्वयं मर्यादित रहकर धर्मयुक्त आचरण करे। धर्म से हीन होने पर इससे निकृष्ट भी कोई नहीं है—‘धर्मेण हीनाः पशुभिः समानाः। मनुष्येतर प्राणी प्रकृति-प्रदत्त मर्यादाओं में रहते हुए स्वजीवन को सञ्चालित करते हैं। इसीलिए वे स्वाभाविक रूप से किसी के लिए संकट नहीं बनते। लेकिन जब मनुष्य धर्मभ्रष्ट होता है तो यह न केवल प्राणिजगत् के लिए अपितु सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के लिए विनाशक बन जाता है। जब-जब यह मर्यादाहीन, धर्महीन हुआ है तब-तब किसी न किसी महामारी के माध्यम से यह सभी के लिए संकट बना है। हमें ऋषियों के निर्देश सर्वथा ध्यान में रखने चाहियें किअपूज्या यत्र पूज्यन्ते पूज्यानां तु विमानना। त्रीणि तत्र प्रवर्त्तन्ते दुर्भिक्षं मरणं भयम्॥ अर्थात् जिस देश व समाज में अपूज्य(दुष्ट) व्यक्तियों की पूजा होती है और पूज्य (परोपकारी) व्यक्तियों का तिरस्कार होता है वहां दुर्भिक्ष (अकाल), असामयिक मृत्यु तथा भय ये तीनों विपत्तियां सदा बनी रहती हैं।

 इसी प्रकार के अनेक कारणों का विवेचन एवं विश्लेषण आयुर्वेद की अध्येत्री दीपिका ने चरक संहिता, विमानस्थान के तृतीय-अध्याय के माध्यम से प्रकृत लेख में किया है।सम्पादक- वैद्य. सुनीता अग्रवाल]  


जब-जब मनुष्य प्रकृति के विपरीत जाता है तब-तब उसे भयंकर क्षति का सामना करना पड़ता है। जैसा कि आजकल दिखाई भी दे रहा है Corona virus के रूप में। जो कहा जा रहा है कि चमगादड़ व सांपों में होने वाली बीमारी है पर आज मनुष्यों में भी देखी जा रही है। यह इसी का तो परिणाम है कि मनुष्य का जो धर्म है वह उसके विपरीत जा रहा है और प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ रहा है। तो प्रकृति तो अपना सन्तुलन सुधारेगी ही वह चाहे जिस भी रूप में हो, चाहे कोई प्राकृतिक आपदा भूकम्प आदि या कोई महामारी। यह कोई पहली बार नहीं है जो प्रकृति एक महामारी के रूप में अपना सन्तुलन बना रही है। हमारे संज्ञान में इससे पहले भी तीन बार प्रकृति यह दोहरा चुकी है—1720 में The Creat plague of Marveille के रूप में, 1820 में The cholera pandamic in Asia के रूप में तथा 1920 में Spanish flu के रूप में और अब 2020  में Corona virus outbreak के रूप में इससे यह  सिद्ध होता है कि प्रकृति अपना सन्तुलन बना ही लेगी चाहे हम उसके साथ कितनी ही छेड़खानी क्यों न कर लें। इसलिए हमें प्रकृति के सन्तुलन के अनुसार ही चलना चाहिए।

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