गुरुवार, 20 जून 2019

योग और स्वास्थ्य


योग और स्वास्थ्य

योग का मतलब होता है किसी वस्तु या पदार्थ को एक-दूसरे में मिलाना अर्थात् जोड़ना। किसी भी वस्तु की वृद्धि हेतु योग, न्यूनता हेतु अयोग(अलग) करना।  योग और वियोग सुख-दु:ख का कारण  हमें अपने जीवन को सुखकर बनाने के लिए किन चीजों का योग तथा किन चीजों का अयोग करना है इसका ज्ञान होना चाहिए।
संसार के समस्त सुख-दु:ख का आधार है शरीर का होना। स्वास्थ्य के लिए जगत् प्रसिद्ध लोकोक्ति है-“पहला सुख निरोगी काया” किसी भी सुख को भोगने के लिए शरीर का निरोग रहना अतिआवश्यक है। हमारा शरीर रोग रहित व जीवन सुखमय कैसे रहें इसपर भारत के प्राचीन ऋषि वैज्ञानिकों (चरक, सुश्रुत, वाग्भट, पतंजलि आदि) ने बहुत ही विस्तार पूर्वक तथा सरल उपायों को बताया है जिसे अपनाकर स्वयं ही नहीं बल्कि परिवार व समाज को भी निरोग व उत्तम बनाने में सहयोगी बन सकते हैं।

बुधवार, 5 जून 2019

विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day)

विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day)

विश्व का पहला पर्यावरण 1974 में मनाया गया था। प्रर्यावरण दिवस मनाने का मतलब है उसके संरक्षण के लिए जागरूक होना। प्रत्येक वर्ष लगभग 143 देश इसमें भाग लेते हैं। तरह-तरह की योजनाएं बनाई जाती हैं लेकिन हर वर्ष यह दिवस मनाने के बाद भी समस्या कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है क्यों यह प्रश्र खड़ा है।

मंगलवार, 21 मई 2019

कानून का दुरुपयोग, पति की व्यथा



🌹 कानून का दुरुपयोग, पति की व्यथा🌹

मैं थाने नहीं आऊंगा


अपने इस घर से कहीं नहीं जाउंगा,
माना पत्नी से थोडा मन मुटाव था,
सोच में अन्तर और विचारों में खिंचाव था,
विश्वास करिये सर ,

"मैनें दहेज नहीं मांगा"

शनिवार, 4 मई 2019

स्वाध्याय के लाभ

स्वाध्याय के लाभ-

स्वाध्यायशील व्यक्ति को भगवान् याज्ञवल्क्य ने इहलोक और परलोक सिद्धि के 10 साधन बतायें हैं- स्वाध्याय के लाभ के रूप में जिन लाभों को गिनाया गया है उनकी प्राप्ति के लिये व्यक्ति भटकता रहता है। लेकिन स्वाध्याय से ये अनायास ही समुदित रूप में व्यक्ति को उपलब्ध हो जाते हैं। आइये एक-एक लाभ पर विचार करते हैं-



गुरुवार, 25 अप्रैल 2019

बेटी ही तो बहु बनती है,


 बेटी ही तो बहु बनती है-


बेटी ही तो बहु बनती है,
मां-बाप को अपना समझती है,
सास-ससुर को बेगाना क्यों,
बड़े उत्साह व सम्मान से,
बहु बनाकर लाये थे,
जीवन का हर श्रृंगार,
मिला सास-ससुर से,
पर हम कृतघ्न क्यों बन गये,
बुढ़ापे में सहारा बनना था,
पर अकेला छोड़ गये,
क्या माता-पिता का दोष नहीं,
कलतक जिस हर घर में,
खुशहाली थी आज,
मातम का माहौल है,
करता माता-पिता का दोष नहीं,
पालन-पोषण करे,
लाड-प्यार से,
कर्त्तव्य बोध कराना न भूले,
माता-पिता प्रथम गुरु हैं,
जीवन के सोपान का,
यदि हम चुक गये,
तो जीवन अर्थहीन हो जायेगा,
अपना कर्तव्य निभाने,
जीवन खुशहाल बनाये,
बेटी को बहु का,
कर्त्तव्य बतायें,
दोनों कुलों का गौरव बढ़ायें,
नारी स्वस्थ,
समाज का आधार है,
आधार को मजबूत करना,
हमारा धर्म। "धर्मों रक्षति रक्षत:"
                  ।।ओ३म।।
~~वैद्य. सुनीता अग्रवाल~~

सोमवार, 22 अप्रैल 2019

सहयोग का महत्व-

सहयोग का महत्व-

✍️एक नाबालिग लड़की ट्रेन में चढ़ गयी उसे पता नहीं था ट्रेन कहां जायेगी। टी टी आया  लड़की सीट के नीचे छिपी थी।

टी टी ने कहा टिकट कहाँ है...?
लड़की ने कहा टिकिट नहीं है साहब काँपती हुई हाथ जोड़कर लडकी बोली,
"तो गाड़ी से उतरो " टीटी ने कहा,
पीछे से बैठी एक महिला ने की टी से कहा इसका टिकट मैं दे रहीं हूँ।

गुरुवार, 18 अप्रैल 2019

तन-मन की पवित्रता-

तन-मन की पवित्रता-



अद्भिर्गात्राणि शुध्यन्ति, मन: सत्येन शुध्यति।विद्यातपोभ्यां भूतात्मा, बुद्धिर्ज्ञानेन शुध्यति।।

                                       (मनुस्मृति 5.109)




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